Fri, 25 Mar 2016 05:03 PM (IST।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी से सासंद चुने जाने से भारतीय जनता पार्टी के साथ ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ भी ताकतवर बना है। काशी प्रांत में संघ की बढ़ी शाखाओं को देखने के बाद से इसका सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है।
अब संघ ने सामाजिक समरसता संदेश को दलित-आदिवासियों के मध्य पहुंचाने का संकल्प लिया है। संघ का दावा है कि विगत दो वर्ष में देशभर में करीब 150 नयी शाखाएं दलित बस्तियों में शुरू हुई हैं।
एक वर्ष में दो हजार सदस्य
संघ की वेबसाइट पर चल रहे संघ से जुड़ो अभियान का भी लाभ मिला है। संघ के प्रांतीय कार्यवाह बांकेलाल के अनुसार वर्ष-2013 में वेबसाइट के माध्यम से लगभग एक हजार युवा संघ से जुड़े थे। अब यह संख्या दो हजार हो गई है। एक वर्ष में काशी प्रांत में लगभग 80 स्थानों पर संघ की नई शाखाएं शुरू हुई हैं। दो हजार से अधिक पूर्णकालिक स्वयंसेवक भी संघ से जुड़े हैं।
दलित एजेंडा लांच
संगठन को नया तेवर देने के क्रम में आरएसएस ने दलित एजेंडा लांच किया है। इस एजेंडे पर संघ व भाजपा साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं। इस क्रम में 'आरएसएस सामाजिक समरसता साल' मनाएगा। यह वर्ष बाबा भीमराव अंबेडकर की 125 वीं जयंती के साथ-साथ पं.दीनदयाल उपाध्याय व संघ के तीसरे सरसंघ चालक बाबा साहब देवरस की जन्म शताब्दी वर्ष तथा रामानुजाचार्य जी की 1000वीं जयंती वर्ष है। इन महापुरुषों ने देश में सामाजिक समरसता के लिए उल्लेखनीय कार्य किए।
नजर दलित वोट बैंक पर
सूबे में मिशन-2017 फतह के लिए संकल्पबद्ध भारतीय जनता पार्टी की नजर अब दलित वोट बैंक पर है। यही कारण है कि आरएसएस के दलित एजेंडे पर केंद्र सरकार आगे बढ़ रही है। अस्पृश्यता के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लडऩे के लिए संघ के स्वयंसेवकों की सेना जल्द ही जमीन पर उतरेगी। अभियान से भाजपा कार्यकर्ता भी जुड़ेंगे। दलितों के उत्थान व उनके जीवन स्तर में सुधार के बाबत केंद्र की ओर से जल्द ही नई योजनाएं लांच होने की संभावना है।
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